किसान की बेटी
बेटी आई थी
अपने पीहर
बहुत तो नहीं पर
प्रसन्न नजर आ रही थी
माता भी खुश थी
और
पिता भी खुश थे।
आंतरिक वेदना को दबाने के
उनके प्रयास को
बेटी बखूबी समझ रही थी।
इस अभाव से उसका भी पुराना नाता था।
उसने तो दो-दो जगह का अभाव देखा है
माँ कितनी खुश है
ये जताने के प्रयास कर रही थी।
इधर बेटी भी
यही प्रयास कर रही थी।
पिता अपनी धोती के पैबंद छुपाने का
हरसंभव प्रयास कर रहा है।
तीनों अपनी दुनिया में
बहुत खुश नजर आ रहे थे।
बेटी आई थी
अपने पीहर
बहुत तो नहीं पर
प्रसन्न नजर आ रही थी
माता भी खुश थी
और
पिता भी खुश थे।
आंतरिक वेदना को दबाने के
उनके प्रयास को
बेटी बखूबी समझ रही थी।
इस अभाव से उसका भी पुराना नाता था।
उसने तो दो-दो जगह का अभाव देखा है
माँ कितनी खुश है
ये जताने के प्रयास कर रही थी।
इधर बेटी भी
यही प्रयास कर रही थी।
पिता अपनी धोती के पैबंद छुपाने का
हरसंभव प्रयास कर रहा है।
तीनों अपनी दुनिया में
बहुत खुश नजर आ रहे थे।
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