Tuesday, 19 December 2017

किसान की बेटी

किसान की बेटी


बेटी आई थी
अपने पीहर
बहुत तो नहीं पर
प्रसन्न नजर आ रही थी

माता भी खुश थी
और
पिता भी खुश थे।

आंतरिक वेदना को दबाने के
उनके प्रयास को
बेटी बखूबी समझ रही थी।

इस अभाव से उसका भी पुराना नाता था।
उसने तो दो-दो जगह का अभाव देखा है

माँ कितनी खुश है
ये जताने के प्रयास कर रही थी।
इधर बेटी भी
यही प्रयास कर रही थी।

पिता अपनी धोती के पैबंद छुपाने का
हरसंभव प्रयास कर रहा है।

तीनों अपनी दुनिया में
बहुत खुश नजर आ रहे थे।

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