मंदबुद्धि बनाम बंदबुद्धि-
मंदबुद्धि होना उतना खतरनाक नहीं
जितना बंदबुद्धि होना।
एक प्रकृत्ति प्रदत्त
दूजी स्व-अर्जित।
एक निरीह
दूजी शातिर।
एक दया की पात्र
दूजी घृणा की।
एक को देखे प्यार उमड़े
दूजी से जुगुप्सा।
क्योंकि मंदबुद्धि होना खतरनाक नहीं
बंदबुद्धि होने से।
एक अतिरिक्त प्यार/स्नेह की आकाँक्षी
दूजी मानवता भक्षिणी।
एक रिश्तों की रक्षिणी
दूजी इनकी कलंकिणी।
एक बेवजह फिरती है
दूजी रिमोट से चलती है।
एक अनायास है देखती
दूजी वसनों को बेधती।
एक मृदुल
दूजी कर्कश।
कभी-कभी दोनों पत्थर भी फेंकती हैं
पर
पर...
एक तब जब माहौल प्रतिकूल लगे
दूजी तब जब माहौल अनुकूल लगे।
संख्या में एक वाली कम है
दूजी वाली भरकम है।
खतरा मंद से नहीं
बंद से माकूल है।
देश को बंद की नहीं
मंद की दरकार है।
#अभिनव_सरोवा
18.08.2018