अभिनव सरोवा,कानाबाती- 9314911782
कितना कुचलोगे पैरों तले?
बीज हूँ आखिर उग ही आऊँगा घास की तरह। कीचड़ में कचरे के ढेर पर दीवार की दरार में तुम्हारे गढ़ की नींव में भी।
अभिनव सरोवा 4 फरवरी 2019
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