चली आ रही परंपराओं को अपनी लेखनी की नोक पर रखने वाले, गोदान जैसे उपन्यास के माध्यम से दलित की आवाज बनने वाले, निर्मला के माध्यम से महिला के दुखों को कागज पर उकेरने वाले और समाज-शैलजा की बहती धारा के विपरीत तैरने वाले मुंशी प्रेमचंद की जयंती है आज। 31 जुलाई 1880 को उत्तरप्रदेश के लमही गाँव में जन्मे मुंशी जी का मूल नाम धनपतराय था। चलिये साहित्य के बहाने तो सदा याद कर लेते हैं आज जयंती के बहाने भी याद कर लिया जाये।
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