आज खामख्वाह उड़ा दी
स्वच्छ भारत अभियान गी
धज्जियाँ
जदै जाँटी छाँग गी
बैठ कँवळी जमीं पर
मेल गोड़े पर
ताजा आकरी बाजरे गी रोटी
टुकड़ा-टुकड़ा दो सापती
खा गो चा गै सागै।
फेर पूँछ मुंडो बुशर्ट गी बाँह गै
अर चढ़ग्यो दूजी जाँटी पर।
ईं घालम-घेल मै ठा ई कोणी
पड्यो क कदै
देश गो अपराधी बणग्यो!
*अभिनव*
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