हत्या?
वो तो रोज होगी
कभी जाति के नाम पर
कभी चाय के नाम पर
कभी खाने के नाम पर
कभी याद दिलाकर कि
तुम्हारे पुरखे
इसी धरा पर नीचे बैठते थे
और तुम
बैठे हो हमारे ही सामने खाट पर
इसे भी वे अपनी भलमनसी का नाम देकर
करेंगे कत्ल तुम्हारा
तुम्हें पसारनी होगी गर्दन अपनी
जो कुछ बोल दिया तो
फेसबुक जैसी हवेली के बाहर
तुम्हारे लिए टाँग देंगे
'ब्लॉक' का बोर्ड
और तुम चाहकर भी
उसे डिस्टर्ब नहीं कर पाओगे।
अभिनव सरोवा
19 जनवरी 2018
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