शहीद का साथी फौजी
भाग-दसवाँ
इधर पिता दबाए बैठा
जमानेभर का दर्द,
माँ-बेटी थीं अनजान
अपनी ही क़यामत से।
उधर सुदूर पूर्वोत्तर में
हो रही तैयारी आखिरी सलामी की
कल तक जो ठोकता था सलाम
आज बड़े से बड़ा ऑफिसर
करके अर्पित पुष्प-चक्र
ठोक रहे सलामी उसको।
पर वो लेटा ताबूत में
बिना किसी प्रतिक्रिया के
आज गाड़े थे उसने
झंडे अपनी बहादुरी के।
ले सलामी वह
हुआ रवाना
अपनी बाल-क्रीड़ा-भूमि को
ट्रक कैंप से एयरपोर्ट को
सरपट दौड़ा जा रहा।
थे कुछ साथी उसमें रोजाना के
उनमें भी एक कुछ खास था
जिसका शरीर आगे को
पर मन पीछे को दौड़ रहा।
यही कोई छह माह पहले ही तो
जुड़ा था यूनिट से
बड़ा मस्त लड़का
सदा हँसता रहता था।
कुछ ही दिनों में बन गया
मेरा लंगोटिया यार
मेरी पत्नी का देवर
बच्चों का चाचा
माँ का छोटा पर प्यारा बेटा।
पर आज.....?
जो कहा
वो कर दिखाया
दो को ढहाकर
सीने ने गोली खाई हैं।
चेहरे पर पीड़ा न शिकन कोई
हाथ भी रहा मूँछों पर
उँगली अभी भी थी
राइफल के ट्रिगर पर।
रात को ड्यूटी जाते
यही कहकर तो गया था
सुबह भाभी से बात करूँगा
और तेरी शिकायत भी।
पर अब कैसे करेगा
बात उससे?
अटैक की खबर पर
पहुँचे घाटी में तो
जाना कि
दो दहशतगर्द
मिल चुके धूल में।
पर एक और था जो
लेटा था, धरती-माँ की गोद में
वो *यार* था मेरा।
हाय! मुझे छोड़कर कैसे चला गया?
तू झूठा था
झूठ कहा था तूने
कि तू मेरा भाई है
यार है मेरा!
पता चला
दो को मारकर
हो गया कुरबान
धरती माँ की खातिर।
देखा मैंने
इसके दाएँ जूते से
रिस रहा खून था
नीचे धरती माँ
कटोरा लिए खड़ी हैं जैसे
बह न जाए कहीं व्यर्थ।
बायाँ जूता पैर में न था
उस पर जमी थी
खून सनी मिट्टी
जो छोड़ना न चाहती थी
पैरों को उसके।
शायद ले रही
शहीद की चरण-रज
बनने का एहसास
और हो रही गौरान्वित।
हमने देखा
उसका शरीर गर्म
पर साँस ठंडी पड़ चुकी थी
आह! मेरे यार
तू कहाँ चला गया,
क्यों चला गया?
तू उठ
तेरी भाभी ने बात करने को कहा था
तू जी भरकर कर शिकायत मेरी
बस तू आँख खोल।
करता हूँ वादा
तेरे ब्याह में
नाचेंगे जोड़े से
जी भरकर नाचेंगे दोनों।
तू आजा एकबार
खोल दे आँखें
नहीं तो
मैं करूँगा शिकायत तेरी
कि ये शादी में बुलाने से डर गया।
तेरा फोन नोट-रिचेबल होने पर
आएगा फोन उसका
तो क्या कहूँगा मैं?
ट्रक पहुँच गया एयरपोर्ट
पर वो अभी भी था
घटनास्थल पर।
अभिनव सरोवा
7 जनवरी 2019
9314911782
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