खतरा...
मैं आया था इस धरा पर
तुम्हारी ही तरह
माँ की कोख से।
पीया था दूध
जैसे पीया था तुमने।
वही हवा, वही अन्न
खाता रहा हूँ
आज तक
तुम्हारी ही तरह।
मुझे बनना था 'आदमी'
पर जाने क्यों
तुमने मुझे खतरा बना दिया।
खतरनाक हो तुम
हाथ लटकाए हर लाश
तुम्हें आदमी नजर आती है
और
तुम्हें हर जिंदा आदमी
खतरा ही नजर आता है
और इस तरह मैं
खुद-ब-खुद
खतरा ही बन गया।
अभिनव सरोवा
हिंदी अध्यापक
23 मार्च 2019
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