हाथ
नहीं हैं हाथ
करने को खुशामद
पकड़ने को पैर
सजाने को रूप।
हाथ तो हैं
तोड़ने को कारा
मोड़ने को धारा
मिलाने को गारा
पकड़ने को बारा(चड़स)
तोड़ने को तारा
तो
तोड़ दो
अंधविश्वास की कारा
मोड़ दो प्रेम की धारा
बना दो बेघर का घर
सींच दो खेत
कर दो वो काम
जो मुश्किल हो
तोड़ने से तारे।
अभिनव सरोवा
23 मार्च 2019
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