निर्दोष मौत-
मौत
दुनिया का
शाश्वत
सनातन
चिरंतन
निरपेक्ष
और
अटल सत्य।
कभी खुद
कभी न्यौते से
कभी रफ्ता-रफ्ता
कभी झटके से।
तेज
लहराते वाहन
कच्ची उम्र के ड्राइवर
मशीन और
बिजली से छेड़छाड़
देते न्यौता
मौत को।
वो आई
भोग लिया और
चलती बनी
पीछे छुट गया
रुदन
क्रंदन
अधूरे सपने
बिखरे-उजड़े परिवार
सूनी गोद
पौंछी हुई माँग
खाली कलाई
बिलखता बचपन
कुढ़ता बुढ़ापा
सिसकते रिश्ते
और
और ऐसा खालीपन
जो भरने से भी
नहीं भरता।
अभिनव सरोवा
26 मई 2019
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