Monday, 10 June 2019

हवा

हवा...

हवा है
बहकी है थोड़ी
बदली है दिशा
पर न भूली है
न छोड़ा है
व्यवहार अपना
तेवर अपने
पुनः आई जो
रुतबे में
उड़ा ले जाएगी
शामियाना तेरा।

हवा है जनाब
ये
पसीना सुखाती भी है
तो छुड़ाती भी है।

अभिनव सरोवा
5 जून 2019

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