Monday, 10 June 2019

जल प्रलय

राह में
जल की
रख पत्थर
मोड़ दी धार
रोक दिया प्रवाह
गुंजाइश छोड़ी है बस
रिसाव की।

तो याद दिला दूँ
यही रिसाव
एक दिन
पड़ेगा भारी।

टूटेगा एकदिन
भरा बाँध
प्रलय निश्चित है।
उस दिन
आएगा सैलाब
ढहेगा गढ़
नफरत का
उस दिन
हम कहेंगे
'आमीन'

अभिनव सरोवा
8 जून 2019

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