Friday, 14 June 2019

लाउडस्पीकर दुकानों के

लाउडस्पीकर दुकानों के.....

'दुकानों' पर के
लाउडस्पीकर
जब चीखते हैं
अलसुबह
तो उठ जाती हैं महिलाएँ
निपटा लेती हैं
घर का काम।

उठ जाते हैं
बड़े-बुजुर्ग
जो फूँकते हैं चिलम, बीड़ी या हुक्का।
या चाटते हैं
चाय की कोपड़ी।

उठ जाते हैं छोटे बच्चे
इठलाते हैं घर भर में
कुछ रोते हैं
कुछ चलाते मोबाइल।

उठ जाते हैं
वो बच्चे भी
जो किसी स्कूल-कॉलेज में
पढ़ रहे होते हैं
गढ़ रहे होते हैं
नींव भविष्य की
तब भले परीक्षा हो सिर पर
पर लाउडस्पीकर का चीखना
कम नहीं होता।

महिलाओं का जल्दी उठना
इतना जरूरी नहीं
जितना जरूरी है
बच्चों का पढ़ना।
घरेलू काम कुछ देर के लिए
टाला जा सकता है
या निपटाया जा सकता है
थोड़ी देर बाद
पर
पढ़ाई नहीं।

आग लगे इन लाउडस्पीकर को।

अभिनव सरोवा
14 जून 2019

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