Tuesday, 19 November 2019

दुश्मन देश के

दुश्मन देश के-

अशिक्षा
बेरोजगारी
भ्रष्टाचार
पाखंड
अंधविश्वास
तंत्र-मंत्र
नशा और
व्यभिचार
हैं असली दुश्मन
मुल्क के।
पर हुकूमत
रही बरगला
सियासी नारों से।

हैं ये दोस्त
सत्ताशीनों के
इससे चलती
उनकी दुकान।

किसान-मजदूर
युवा और नारी
लुटते हैं रोज
बीच बाजार।

रखकर अंधेरे में
जनसमूह को
वो करते राज
फिर-फिर
बदल-बदल।

बताकर खतरा
झूठे दुश्मन का
फेंका जाता
असली दुश्मनों में
असली दुश्मनों द्वारा।

देश के दुश्मन
मजहबी दुर्भाव
बेरोजगारी
अशिक्षा
भ्रष्टाचार और
गंदी सियासत है।

अभिनव सरोवा
08 अप्रैल 2019

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