दुश्मन देश के-
अशिक्षा
बेरोजगारी
भ्रष्टाचार
पाखंड
अंधविश्वास
तंत्र-मंत्र
नशा और
व्यभिचार
हैं असली दुश्मन
मुल्क के।
पर हुकूमत
रही बरगला
सियासी नारों से।
हैं ये दोस्त
सत्ताशीनों के
इससे चलती
उनकी दुकान।
किसान-मजदूर
युवा और नारी
लुटते हैं रोज
बीच बाजार।
रखकर अंधेरे में
जनसमूह को
वो करते राज
फिर-फिर
बदल-बदल।
बताकर खतरा
झूठे दुश्मन का
फेंका जाता
असली दुश्मनों में
असली दुश्मनों द्वारा।
देश के दुश्मन
मजहबी दुर्भाव
बेरोजगारी
अशिक्षा
भ्रष्टाचार और
गंदी सियासत है।
अभिनव सरोवा
08 अप्रैल 2019
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