Saturday, 25 September 2021

रीट परीक्षा

पता नहीं किसका चयन होगा और किसका नहीं लेकिन इतना तय है कि लोगों द्वारा परीक्षार्थियों के लिए रहने, खाने और सरकार के द्वारा निश्शुल्क परिवहन की सुविधा यकीनी तौर पर स्वागत योग्य हैं। शुरू में जाति आधारित व्यवस्था करने का चलन हुआ था। इसी आधार पर खुद मुझसे भी संपर्क किया गया, जिसके लिए स्पष्ट मना कर दिया गया। लेकिन जैसे-जैसे समय बीतता गया, वैसे-वैसे लोग सिर्फ़ परीक्षार्थियों(बगैर जाति, धर्म, लिंग, भाषा, वर्ण के) की मदद करने हेतु आगे आने लगे। अभी आलम ये है कि हर छोटे से छोटे कस्बे में भी बच्चों और उनके साथ आने वाले परिजनों के लिए माकूल सुविधाएँ उपलब्ध करवाने की ख़बरें मिल रही हैं। ये चीजें सुकून देने वाली हैं। हालांकि एकाध जगह पैसों के पूत थोड़ी-बहुत बदमाशियाँ भी कर सकते हैं लेकिन उनका इन व्यवस्थाओं के आगे तो कोई मोल नहीं रह जाएगा फिर भी भुगतने वाले साथी तो कटु अनुभव लेकर ही जाएँगे। उम्मीद करते हैं कि ऐसे वाकयात कम ही होंगे, उँगलियों पर गिनने लायक। बीच में दुर्घटना की ख़बर भी मिली। यकीनन मायूस कर देने वाली ख़बर थी। सरकार को चाहिए कि दिवंगतों के परिवार को आर्थिक मदद और घायल बच्चों को कुछ रियायत दी जाए। 

     परीक्षा में बैठने वाले सभी बच्चे भविष्य के शिक्षक या कहें कि नागरिक हैं। उन्हें लगना चाहिए कि आप एकाकी नहीं हैं, हम सब आपके साथ हैं। दूसरे जिलों से आने वालों के दिल-ओ-दिमाग पर एक अमिट छाप लग जानी चाहिए। बोलना नहीं कि हम एक हैं बल्कि साबित  करना है कि हम एक 🤝🏻थे, हैं और आगे भी रहेंगे। 
      ज़िन्दगी एक युद्ध है और ये परीक्षा एक मुठभेड़। जरूरी है कि मुठभेड़ में ही माकूल जवाब दिया जाए ताकि भविष्य की लड़ाई जीती जा सके। खुदुगिरबो इत्तो होणो चाहिजै कि आपां रड़क स्यूँ कह सकां कि म्हे बे सागण ही हाँ। सभी परीक्षार्थियों या कहें कि मेरे कुनबे के अनुज-अनुजाओं को शुभकामनाएँ। बधाई अभी हमारे पास धरोहर के रूप में है, समय पर प्रेषित करेंगे। 

जय हो, शुभ हो।
 

थारो सागड़दी- अभिनव सरोवा
25 सितंबर, 2021

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