मेरे हिस्से की चाँदनी.....
वो चाँद के रखवाले
मेरे हिस्से पर भी
पहरा लगाए बैठे हैं
मेरे हिस्से में बचा है
सिर्फ कृष्ण पक्ष।
मैं सोचता रहा कि
मेरी रात काली है
दिन नहीं,
इसलिए
दिनभर बहाकर पसीना
रात को सोता रहा चैन से।
उसी काली स्याह
घुप्प अंधेरी रात में
वो रचते रहे षड्यंत्र।
मिला देते मिट्टी में
दिनभर की मेहनत मेरी।
अभिनव सरोवा
17 जून 2019
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